शुक्रवार, अगस्त 26, 2011

महाराणा प्रताप एवं प्रथ्विराज सिंह

सवाल: पीथल (प्रथ्विराज) जवाब: पातळ (प्रताप)
पातल और पीथल
सवाल: -
म्हे आज सुणी है नाहरियो, स्याळां रै सागै सोवै लो,
म्हे आज सुणी है सूरजड़ो, बादळ री ओटां खोवैलो;
जवाब: -
पीथळ के खिमता बादल री, जो रोकै सूर उगाळी नै,
सिंघां री हाथळ सह लेवै,बा कूख मिली कद स्याळी नै?


सवाल:
म्हे आज सुणी है चातगड़ो, धरती रो पाणी पीवै लो,
म्हे आज सुणी है हाथीड़ो, कूकर री जूणां जीवै लो
जवाब:
धरती रो पानी पीवे इसी चाताग्दी चुन्च बनी कोणी ,
कुकर रीजूणां जीवै इसी हाथी री बात सुनी कोणी


सवाल:
म्हे आज सुणी है थकां खसम, अब रांड हुवैली रजपूती,
म्हे आज सुणी है म्यानां में, तरवार रवैली अब सूती,
जवाब:
आं हाथां में तलवार थकां, कुण रांड़ कवै है रजपूती ?
म्यानां रै बदळै बैर्यां री, छात्याँ में रैवैली सूती,

सवाल:
तो म्हांरो हिवड़ो कांपै है मूंछ्यां री मोड़ मरोड़ गई,
पीथळ नै राणा लिख भेज्यो आ बात कठै तक गिणां सही ?

जवाब:
राखो थे मूंछ्याँ ऐंठ्योड़ी, लोही री नदी बहा द्यूंला,
हूँ अथक लडूंला अकबर स्यूँ , उजड्यो मेवाड़ बसा द्यूंला,
मेवाड़ धधकतो अंगारो आंध्यां में चमचम चमकै लो,
कड़खै री उठती तानां पर पग पग पर खांडो खड़कैलो,

प्रातःस्मरणीय महाराणा प्रताप को शत-शत नमन

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