अपने करिश्माई अंदाज और जिंदादिल व्यक्तित्व के चलते 50 और 60 के दशक में बड़े पर्दे पर राज करने वाले जाने-माने अभिनेता शम्मी कपूर का रविवार को निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे।
कपूर खानदान के एक महत्वपूर्ण सदस्य और राज कपूर तथा शशि कपूर के भाई शम्मी कपूर का आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में सुबह पांच बजकर पंद्रह मिनट पर निधन हो गया। उनका निधन गुर्दे के काम करना बंद कर देने के कारण हो गया। अमेरिका से शम्मी कपूर के पोते के आ जाने पर कल दक्षिण मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
शमशेर से बने शम्मी : शम्मी का वास्तविक नाम शमशेर राज कपूर था। 21 अक्तूबर 1931 को जन्मे शम्मी रंगमंच के जाने-माने अदाकार और फिल्म अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के दूसरे पुत्र थे। उनके परिवार में पत्नी नीला देवी, पुत्र आदित्य राज और पुत्री कंचन देसाई हैं। शम्मी ने वर्ष 1948 में एक जूनियर कलाकार के रूप में फिल्म उद्योग में कदम रखा था और वर्ष 1953 में बॉलीवुड में दस्तक देने वाले शम्मी की पहली फिल्म ‘जीवन ज्योति’ थी। वर्ष 1961 में सुपरहिट फिल्म ‘जंगली’ ने उन्हें बड़े पर्दे की दुनिया में खास जगह दिला दी।
अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि और ‘रेल का डिब्बा’ में मधुबाला, ‘शमा परवाना’ में सुरैया और ‘हम सब चोर हैं’ में नलिनी जयवंत के साथ अभिनय करने के बावजूद शम्मी शुरुआत में सफल नहीं रहे।
शम्मी कपूर की शुरुआती फिल्में बॉक्स ऑफिस पर विफल रहीं। उन्होंने पचास के दशक में ‘डक-टेल’ शैली में अपने बाल कटवाकर ‘तुमसा नहीं देखा’ के साथ खुद को नई तरह से पेश किया। उसके बाद से उन्हें सफलता मिलती गयी। वर्ष 1961 में फिल्म ‘जंगली’ की सफलता के साथ ही पूरा दशक उनकी फिल्मों के नाम रहा।
दर्शकों के बीच उनकी अपील ‘सुकू सुकू’, ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’, ‘आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ और ‘आ जा आ जा मैं हूं प्यार तेरा’ जैसे गानों के चलते थी, जिनमें उन्होंने बड़ी ही मस्तमौला शैली में थिरकते हुए अदायगी दी। हालांकि, ‘कश्मीर की कली’, ‘राजकुमार’, ‘जानवर’ और ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ जैसी कुछ फिल्मों में उनके अभिनय पर सवाल उठे, लेकिन ‘जंगली’, ‘बदतमीज’, ‘ब्लफ मास्टर’, ‘पगला कहीं का’, ‘तीसरी मंजिल’ और ‘ब्रह्मचारी’ की बेहतरीन सफलता से शम्मी ने अपने आलोचकों के मुंह बंद कर दिए। वर्ष 1971 में आई ‘अंदाज’ मुख्य किरदार की अदायगी वाली उनकी आखिरी फिल्म थी, लेकिन बाद में ‘विधाता’, ‘हीरो’ और ‘प्रेम रोग’ जैसी फिल्मों में भी वे नजर आए और सराहे गए। वह कंप्यूटर के बहुत बड़े शौकीन थे और माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर की दुनिया में सबसे पहले कदम रखने वालों में शम्मी कपूर शामिल थे।
कपूर खानदान के एक महत्वपूर्ण सदस्य और राज कपूर तथा शशि कपूर के भाई शम्मी कपूर का आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में सुबह पांच बजकर पंद्रह मिनट पर निधन हो गया। उनका निधन गुर्दे के काम करना बंद कर देने के कारण हो गया। अमेरिका से शम्मी कपूर के पोते के आ जाने पर कल दक्षिण मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
शमशेर से बने शम्मी : शम्मी का वास्तविक नाम शमशेर राज कपूर था। 21 अक्तूबर 1931 को जन्मे शम्मी रंगमंच के जाने-माने अदाकार और फिल्म अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के दूसरे पुत्र थे। उनके परिवार में पत्नी नीला देवी, पुत्र आदित्य राज और पुत्री कंचन देसाई हैं। शम्मी ने वर्ष 1948 में एक जूनियर कलाकार के रूप में फिल्म उद्योग में कदम रखा था और वर्ष 1953 में बॉलीवुड में दस्तक देने वाले शम्मी की पहली फिल्म ‘जीवन ज्योति’ थी। वर्ष 1961 में सुपरहिट फिल्म ‘जंगली’ ने उन्हें बड़े पर्दे की दुनिया में खास जगह दिला दी।
अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि और ‘रेल का डिब्बा’ में मधुबाला, ‘शमा परवाना’ में सुरैया और ‘हम सब चोर हैं’ में नलिनी जयवंत के साथ अभिनय करने के बावजूद शम्मी शुरुआत में सफल नहीं रहे।
शम्मी कपूर की शुरुआती फिल्में बॉक्स ऑफिस पर विफल रहीं। उन्होंने पचास के दशक में ‘डक-टेल’ शैली में अपने बाल कटवाकर ‘तुमसा नहीं देखा’ के साथ खुद को नई तरह से पेश किया। उसके बाद से उन्हें सफलता मिलती गयी। वर्ष 1961 में फिल्म ‘जंगली’ की सफलता के साथ ही पूरा दशक उनकी फिल्मों के नाम रहा।
दर्शकों के बीच उनकी अपील ‘सुकू सुकू’, ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’, ‘आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ और ‘आ जा आ जा मैं हूं प्यार तेरा’ जैसे गानों के चलते थी, जिनमें उन्होंने बड़ी ही मस्तमौला शैली में थिरकते हुए अदायगी दी। हालांकि, ‘कश्मीर की कली’, ‘राजकुमार’, ‘जानवर’ और ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ जैसी कुछ फिल्मों में उनके अभिनय पर सवाल उठे, लेकिन ‘जंगली’, ‘बदतमीज’, ‘ब्लफ मास्टर’, ‘पगला कहीं का’, ‘तीसरी मंजिल’ और ‘ब्रह्मचारी’ की बेहतरीन सफलता से शम्मी ने अपने आलोचकों के मुंह बंद कर दिए। वर्ष 1971 में आई ‘अंदाज’ मुख्य किरदार की अदायगी वाली उनकी आखिरी फिल्म थी, लेकिन बाद में ‘विधाता’, ‘हीरो’ और ‘प्रेम रोग’ जैसी फिल्मों में भी वे नजर आए और सराहे गए। वह कंप्यूटर के बहुत बड़े शौकीन थे और माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर की दुनिया में सबसे पहले कदम रखने वालों में शम्मी कपूर शामिल थे।