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शनिवार, सितंबर 03, 2011

भगवान देवनारायण स्मृति डाक टिकट जारी



भादवी छठ के मौके पर शनिवार को सवाईभोज की धरती आसीन्द में भगवान देवनारायण स्मृति डाक टिकट जारी किया गया। केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री सचिन पायलट ने भारतीय डाक विभाग की ओर से आयोजित समारोह में पांच रूपए मूल्य के इस टिकट का अनावरण किया।


सवाईभोज मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में पायलट ने भगवान देवनारायण को जन-जन की आस्था का केन्द्र बताते हुए कहा कि डाक टिकट जारी कर वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। सचिन का करीब दस मिनट का उद्बोधन सुनने के लिए हजारों लोग बारिश में भी प्रागंण में जमे रहे।


समारोह में राजस्थान परिमण्डल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल राजीव सिंह ने जारी किए गए डाक टिकट के बारे में जानकारी दी। समारोह में जिला प्रभारी एवं ऊर्जा मंत्री जितेन्द्र सिंह, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री रामलाल जाट, विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह, अजमॆर रिजन कॆ पॊस्टमास्टर जनरल बी. एन. त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थे। संचालन अशोक व्यास एवं मोहम्मद हनीफ, सहायक निदॆशक डाक सॆवाऎ अजमॆर रिजन ने किया।


इस डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण व विवरणिका की बिर्क्री हॆतु उदयपुर शास्त्री सर्किल फिलाटॆली ब्यूरॊ का विशॆष काउन्टर लगाया गया!

शुक्रवार, अगस्त 12, 2011

रविवार, जुलाई 31, 2011

Stamps on Dr D.S. Kothari

Dr.D.S.Kothari,an eminent Indian scientist was born in Udaipur in Rajasthan on 6th July 1906.He did his MSc in Wireless (Electronics) and later obtained PhD under the supervision of Ernst Rutherford at the Cavendish Laboratory, Cambridge.He brought about a lot of changes in the Physics Department when he was in Delhi University as the Reader and Head of Physics Department.He was scientific advisor to Ministry of defence from 1948 to 1961.

Dr. Kothari has made immense contribution to the field of education and was appointed as the Chairman of the Indian Education Commission in 1964. He was appointed as chairperson of University Grants Commission in 1961 where he worked till 1973.Besides this he held many other important posts in the field of Education.

He has won several honours and awards for his contribution in the field of Science and Education. He received the Padma Bhusan in 1962 and the Padma Vibhushan in 1973.

He passed away on 4th Feb.1993.

रविवार, जुलाई 24, 2011

डाक टिकट संग्रह


डाक टिकट संग्रह केवल एक शौक ही नहीं बल्कि एक ज्ञानवर्द्धक व लाभप्रद मनोरंजन भी है। सामान्यतः डाक टिकट एक छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखता है, पर इसका महत्व और कीमत दोनों ही इससे काफी ज्यादा है। डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति एवं विरासत के प्रतिबिम्ब हैं जिसके माध्यम से वहाँ के इतिहास, कला, विज्ञान, व्यक्तित्व, वनस्पति, जीव-जन्तु, राजनयिक सम्बन्ध एवं जनजीवन से जुडे़ विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिलती है। मन को मोह लेने वाली जीवन शक्ति से भरपूर डाक टिकटों का संकलन लोगों के सांस्कृतिक लगाव, विविधता एवं सुरूचिपूर्ण चयन का भी परिचायक है। रंग-बिरंगे डाक टिकटों का संग्रह करने वाले लोग जहाँ इस शौक के माध्यम से परस्पर मित्रता में बँधकर सम्बन्धों को नया आयाम देते हैं वहीं इसके व्यवहारिक पहलुओं का भी बखूबी इस्तेमाल करते हैं। मसलन रंग-बिरंगे टिकटों से जहाँ खूबसूरत ग्रीटिंग कार्ड बनाये जा सकते हैं वहीं इनकी खूबसूरती को फ्रेम में भी कैद किया जा सकता है। बचपन से ही बच्चों को फिलेटली के प्रति उत्साहित कर उनको अपनी संस्कृति, विरासत एवम् जनजीवन से जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में मनोरंजक रूप से बताया जा सकता है।

डाक-टिकटों के संकलन का सबसे आसान तरीका ‘फिलेटलिक जमा खाता योजना’ है। जिसके तहत न्यूनतम रूपये 200/- जमा करके खाता खोला जा सकता है और भारतीय डाक विभाग देय मूल्य के बराबर रंगीन डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण और विवरणिका खाताधारक के पते पर हर माह बिना किसी अतिरिक्त मूल्य के पहुँचाता है। अपने किसी खास रिश्तेदार या मित्र को सरप्राइज गिट देने के लिए भी फिलेटलिक जमा खाता एक अनूठी चीज है और घर बैठे-बैठे खूबसूरत डाक-टिकट पाने वाला वह रिश्तेदार/दोस्त भी अचरज में पड़ जायेगा कि उस पर इतनी खूबसूरत मेहरबानी करने वाला शख्स कौन हो सकता है? इसके अलावा डाक विभाग वर्ष भर में जारी सभी टिकटों अथवा किसी थीम विशेष के डाक-टिकटों को समेटकर एक विशेष ‘स्टैम्प कलेक्टर्स पैक’ जारी करता है जो आज की विविधतापूर्ण दुनिया में एक अनूठा उपहार भी हो सकता है। और तो और, डाक-विभाग द्वारा सन् 1999 से प्रति वर्ष आयोजित ‘डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता’ के विजेता की डिजाइन को अगले बाल-दिवस पर डाक-टिकट के रूप में जारी किया जाता है। इसी प्रकार 1998 से भारतीय डाक द्वारा आयोजित ‘डाक टिकट लोकप्रियता मतदान’ में प्रति वर्ष भाग लेकर सर्वोत्तम डाक-टिकटों का चुनाव किया जा सकता है।

फिलेटली को यूँ ही शौकों का राजा नहीं कहा जाता, वस्तुतः यह चीज ही ऐसी है। एक तरफ फिलेटली के माध्यम से अपनी सभ्यता और संस्कृति के गुजरे वक्त को आईने में देखा जा सकता है, वहीं इस नन्हें राजदूत का हाथ पकड़ कर नित नई-नई बातें भी सीखने को मिलती हैं। निश्चिततः आज के व्यस्ततम जीवन एवम् प्रतिस्पर्धात्मक युग में फिलेटली से बढ़कर कोई भी रोचक और ज्ञानवर्द्धक शौक नहीं हो सकता। व्यक्तित्व परिमार्जन के साथ-साथ यह ज्ञान के भण्डार में भी वृद्धि करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी0 रूजवेल्ट ने डाक-टिकट संग्रह के सम्बन्ध में कहा था- “The best thing about stamp collecting is that the enthusiasm which it arouses in youth increases as the years pass. It dispels boredom, enlarges our vision, broadens our knowledge and in innumerable ways enriches our life. I recommend stamp collecting because I really believe that it makes one a better citizen.”

Aabhar: http://dakbabu.blogspot.com